उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi ka hai ye bhi koi Dhang

ज़िंदगी का है ये भी कोई ढंग

زندگی کا ہے یہ بھی کوئی ڈھنگ

शायर: Badr Jamali8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी का है ये भी कोई ढंग
न कोई आरज़ू न कोई उमंग

होश का तूर या ख़िरद का रंग
आशिक़ी के लिए हैं दोनों नंग

अक़्ल हैराँ है और फ़िक्र है दंग
जल्वा और वो भी सर-ब-सर बे-रंग

सुल्ह-ए-कुल इश्क़ का हर इक अंदाज़
हुस्न की हर अदा पयाम-ए-जंग

अभी जीते हैं अहरमन-ज़ादे
अभी बरपा है ख़ैर-ओ-शर की जंग

अल्लाह अल्लाह ये हुस्न का आलम
फूल जैसे खिले हों रंगा-रंग

क़हक़हे उन के साग़रों की खनक
मुस्कुराहट तुलू-ए-सुब्ह का रंग

कितनी रंगीन है ग़ज़ल तेरी
बंध गया बज़्म में 'जमाली' रंग