उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abhi tak tishna-e-takmil meri zindagani hai

अभी तक तिश्ना-ए-तकमील मेरी ज़िंदगानी है

ابھی تک تشنۂ تکمیل میری زندگانی ہے

शायर: Badr Jamali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अभी तक तिश्ना-ए-तकमील मेरी ज़िंदगानी है
अभी तक इंतिज़ार-ए-दोस्त की बाक़ी कहानी है

ये अपनी ज़िंदगी रम्ज़-ए-मन-ओ-तू की कहानी है
न कुछ क़ुर्ब-ए-मकानी है न कुछ बो'द-ए-ज़मानी है

मुरत्तब कर रहा हूँ दास्ताँ हुस्न-ए-गुरेज़ाँ की
तबी'अत में ब-रू-ए-कार दरिया की रवानी है

तुम्हारा हुस्न भी कामिल हमारा 'इश्क़ भी क़ाबिल
न इस का कोई हम-सर है न इस का कोई सानी है

'जमाली' यास-ओ-हसरत के सिवा कुछ भी नहीं पाया
ये अपनी ज़िंदगी बरगश्ता क़िस्मत की कहानी है