उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har gham pe aaj-kal hai KHushi ka guman mujhe

हर ग़म पे आज-कल है ख़ुशी का गुमाँ मुझे

ہر غم پہ آج کل ہے خوشی کا گماں مجھے

शायर: Badr Jamali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर ग़म पे आज-कल है ख़ुशी का गुमाँ मुझे
ले आई याद-ए-यार कहाँ से कहाँ मुझे

मंज़ूर ज़ौक़-ए-दीद का हो इम्तिहाँ मुझे
ये ताब ये मजाल ये ताक़त कहाँ मुझे

यारब क़फ़स की ख़ैर कि देखा जो ख़्वाब भी
आया है बिजलियों में नज़र आशियाँ मुझे

आज़ादी-ए-ख़याल के वो रंग अब कहाँ
था इब्तिदा में कुंज-ए-क़फ़स आशियाँ मुझे

ज़ौक़-ए-तलब का राज़ यही ज़िंदगी यही
हर कारवाँ है गर्द-ए-पस-ए-कारवाँ मुझे

मैं जान-ए-रंग-ओ-बू हूँ मैं आराइश-ए-चमन
तू क्या समझ रहा है मिरे बाग़बाँ मुझे

तेवर निगाह-ए-नाज़ के कुछ दिन यही जो हैं
यारा-ए-ज़ब्त-ए-राज़ 'जमाली' कहाँ मुझे