उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi ek saza lage hai mujhe

ज़िंदगी इक सज़ा लगे है मुझे

زندگی اک سزا لگے ہے مجھے

शायर: Ejaz Ansari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी इक सज़ा लगे है मुझे
जब से तू बेवफ़ा लगे है मुझे

तुझ में ख़ुद को तलाश करता हूँ
तू मिरा आईना लगे है मुझे

नासेह-ए-कम-निगाह का किरदार
इश्क़ में अब बुरा लगे है मुझे

अपनी आवाज़ से भी डरता हूँ
साज़-ए-दिल भी सज़ा लगे है मुझे

इंतिहा है ये बद-नसीबी की
हर दुआ बद-दुआ' लगे है मुझे

आशिक़ी जुर्म तो नहीं 'एजाज़'
किस लिए फिर ख़ता लगे है मुझे