उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bichhaD ke tujhse mujhe dukh to hai malal to hai

बिछड़ के तुझ से मुझे दुख तो है मलाल तो है

بچھڑ کے تجھ سے مجھے دکھ تو ہے ملال تو ہے

शायर: Ejaz Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिछड़ के तुझ से मुझे दुख तो है मलाल तो है
मगर ये प्यार निभाना भी इक कमाल तो है

करम सही न सही अब तिरे सितम ही सही
यही बहुत है कि तुझ को मिरा ख़याल तो है

मैं इस ख़याल से शोहरत से दूर रहता हूँ
उरूज कितना भी हो एक दिन ज़वाल तो है

मैं बुझ गया हूँ ज़माने की आंधियों से मगर
मिरा वजूद सुलगता हुआ सवाल तो है

न चाह कर भी मिरा ज़िक्र करते रहते हैं
मुख़ालिफ़ों में ये ख़ूबी तो है कमाल तो है

मैं मुतमइन हूँ बुज़ुर्गों से राब्ता रख कर
जुड़ा हुआ मिरे माज़ी से मेरा हाल तो है

ज़ईफ़ बाप का साया भी कम नहीं 'एजाज़'
महाज़-ए-ज़ीस्त में ये नाम एक ढाल तो है