उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne muhafizon se hirasan hai zindagi

अपने मुहाफ़िज़ों से हिरासाँ है ज़िंदगी

اپنے محافظوں سے ہراساں ہے زندگی

शायर: Ejaz Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने मुहाफ़िज़ों से हिरासाँ है ज़िंदगी
इस ज़िंदगी के हाल पे हैराँ है ज़िंदगी

यूँ रूनुमा हुए मिरे हालात में तज़ाद
गुलशन कभी थी आज बयाबाँ है ज़िंदगी

उस शख़्स का भी आज मुक़द्दर सँवर गया
लिक्खा था जिस के दर पे परेशाँ है ज़िंदगी

घर बैठने से मिल न सकेगा कोई सुराग़
'अज़्म-ओ-'अमल की राह में पिन्हाँ है ज़िंदगी

क्यों ज़िंदगी की मुझ को दुआ दे रहे हैं आप
मेरे लिए तो मौत का सामाँ है ज़िंदगी

दो-चार दिन में ग़म से मिलेगी हमें नजात
दो-चार दिन की और ये मेहमाँ है ज़िंदगी

'ए'जाज़' कोई पूछने वाला नहीं यहाँ
उर्दू की तरह बे-सर-ओ-सामाँ है ज़िंदगी