उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hath mein apne hifazat ka asa le jaana

हाथ में अपने हिफ़ाज़त का असा ले जाना

ہاتھ میں اپنے حفاظت کا عصا لے جانا

शायर: Ejaz Ansari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाथ में अपने हिफ़ाज़त का असा ले जाना
घर से जाना तो बुज़ुर्गों की दुआ ले जाना

बात जब तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ ही पे आ पहुँची है
अपने ख़त भी मिरे कमरे से उठा ले जाना

जेब ख़ाली है मगर दिल में बड़ी वुसअ'त है
तुम मिरे गाँव के लोगों से वफ़ा ले जाना

तेरे हाथों में है पतवार मिरी कश्ती की
तू जिधर चाहे उसी सम्त बहा ले जाना

मुझ से मिलने के लिए वो भी तड़पता होगा
मेरे ख़्वाबो मुझे हाथों पे उठा ले जाना

पगड़ियाँ रोज़ उछलती हों जहाँ पर 'एजाज़'
हम ने सीखा वहाँ इज़्ज़त को बचा ले जाना