उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazlon ko ye andaz-e-hunar kaT raha hai

ग़ज़लों को ये अंदाज़-ए-हुनर काट रहा है

غزلوں کو یہ انداز ہنر کاٹ رہا ہے

शायर: Ejaz Ansari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़लों को ये अंदाज़-ए-हुनर काट रहा है
हीरा है कि शीशे का जिगर काट रहा है

बेटे की पढ़ाई पे किया जिस ने बहुत ख़र्च
बेटा अब उसी बाप का सर काट रहा है

हैरत है कि उड़ना अभी सीखा नहीं जिस ने
वो भी मिरे बाज़ू मिरे पर काट रहा है

देखूँ तिरी जानिब तो लरज़ती हैं निगाहें
वहशत मुझे इतनी है कि घर काट रहा है

वो मुझ से मुख़ातिब है इस अंदाज़ में 'ए'जाज़'
जैसे किसी जादू का असर काट रहा है