उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi hai ki yas ka mausam

ज़िंदगी है कि यास का मौसम

زندگی ہے کہ یاس کا موسم

शायर: M Ali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी है कि यास का मौसम
जब भी देखूँ है प्यास का मौसम

और 'उर्यां सी हो गई दुनिया
जब से आया लिबास का मौसम

एक शो'ला था बुझ गया वो भी
सर्द है आस-पास का मौसम

अब किसी बाब में समा जाएँ
आ गया इक़्तिबास का मौसम

कैसे रेशम का कारोबार चले
आज-कल है कपास का मौसम

साँस डर डर के चल रही है 'अली'
हर तरफ़ है हिरास का मौसम