उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aasmanon se utar kar rah gaye

आसमानों से उतर कर रह गए

آسمانوں سے اتر کر رہ گئے

शायर: M Ali8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आसमानों से उतर कर रह गए
आदमी थे हम बिखर कर रह गए

टूट कर जब एक आईना गिरा
कितने ही चेहरे उतर कर रह गए

खेलने देगी न अब पागल हवा
ताश के पत्ते बिखर कर रह गए

धूप में दीवार नंगी हो गई
रंग थे कच्चे उतर कर रह गए

मैं वो नुक़्ता हूँ कि जिस को देख कर
दाएरे टूटे बिखर कर रह गए

दोपहर जब सब तमाज़त पी गई
शाम के मंज़र निखर कर रह गए

ज़ुल्मतों से ख़ौफ़ खाते थे कभी
रौशनी में आज डर कर रह गए

उन की क़स्में उन के वा'दे ऐ 'अली'
जैसे मौसम थे गुज़र कर रह गए