उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaane kya tha aur kya kahte rahe

जाने क्या था और क्या कहते रहे

جانے کیا تھا اور کیا کہتے رہے

शायर: M Ali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाने क्या था और क्या कहते रहे
हादसे को वाक़ि'आ कहते रहे

जल गया घर तब हुआ मा'लूम ये
एक शो'ले को दिया कहते रहे

आँख वालों में बसारत थी कहाँ
संग को भी आइना कहते रहे

सर की 'अज़्मत से था जिन को एहतिराज़
आदमी को भी ख़ुदा कहते रहे

जाने क्या थी मस्लहत ग़ुंचे तमाम
इक बगूले को सबा कहते रहे

जाने क्या थीं ज़ब्त की मजबूरियाँ
हर सितम को सानिहा कहते रहे

जिस के होंटों पर सदाक़त थी 'अली'
लोग उस को बावला कहते रहे