उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jabr se iKHtiyar tak sab jhuT

जब्र से इख़्तियार तक सब झूट

جبر سے اختیار تک سب جھوٹ

शायर: M Ali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब्र से इख़्तियार तक सब झूट
फ़त्ह से इक़्तिदार तक सब झूट

मंज़िलों का फ़रेब क्या कहिए
कारवाँ से ग़ुबार तक सब झूट

रंग क्या शय है ख़ुशबुएँ क्या हैं
आशियाँ से बहार तक सब झूट

महफ़िल-ए-'ऐश मुतरिबा साक़ी
जाम-ओ-मय से ख़ुमार तक सब झूट

दश्त-ओ-दरिया पहाड़ और सहरा
अस्प से शहसवार तक सब झूट

प्यास बाक़ी थी प्यास बाक़ी है
संग से आबशार तक सब झूट

इक ख़ुदा ही है सच 'अली' वर्ना
वह्म से ए'तिबार तक सब झूट