उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhen bhi dil ki hoti hain ghammaz dekhna

आँखें भी दिल की होती हैं ग़म्माज़ देखना

آنکھیں بھی دل کی ہوتی ہیں غماز دیکھنا

शायर: M Ali8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखें भी दिल की होती हैं ग़म्माज़ देखना
ग़ैरों पे खुल न जाए कहीं राज़ देखना

जो दुश्मन-ए-बहार थे गुल-पोश हो गए
काँटों पे चल रहे हैं चमन-साज़ देखना

तन्हाइयों की कौन सी मंज़िल पे आ गई
है अजनबी सी अपनी ही आवाज़ देखना

माना कि बोल-बाला अभी ज़ुल्मतों का है
चमके 'उफ़ुक़ तो सुब्ह के अंदाज़ देखना

शाहीन को भला किसी आँगन से क्या ग़रज़
दे आसमान फिर मिरी परवाज़ देखना

जिस ने ज़बान काट दी आवाज़ छीन ली
हाथों में दे गया वही इक साज़ देखना

पत्थर को फूल फूल को पत्थर बना दिया
उस की निगाह-ए-नाज़ का ए'जाज़ देखना

कल भी हसीन और जवाँ थी ग़ज़ल 'अली'
किस रंग में है आज ये शहनाज़ देखना