उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zikr mera agar aa jata hai

ज़िक्र मेरा अगर आ जाता है

ذکر میرا اگر آ جاتا ہے

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िक्र मेरा अगर आ जाता है
सुन के वो साफ़ उड़ा जाता है

ग़म तिरा हिस्सा है मेरा लेकिन
दिल चुरा कर उसे खा जाता है

क्या नज़ाकत है कि आप आइने में
अक्स के साथ खिंचा जाता है

नाज़ से खींच न मुझ पर तलवार
ग़ैर मुश्ताक़ हुआ जाता है

हसरतें दिल की मिटी जाती हैं
क़ाफ़िला है कि लुटा जाता है

राह में गिर न पड़े ख़त या-रब
नामा-बर मिस्ल-ए-हवा जाता है

'दाग़' को देख के बोले ये शख़्स
आप ही आप जला जाता है