उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaruraton ke sabab kya se kya banane laga

ज़रूरतों के सबब क्या से क्या बनाने लगा

ضرورتوں کے سبب کیا سے کیا بنانے لگا

शायर: Ehsanul Haq Mazhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़रूरतों के सबब क्या से क्या बनाने लगा
दिया बना के मैं ख़ुद ही हवा बनाने लगा

मैं पहले पहले बनाता रहा ख़याल का जिस्म
फिर उस के बाद तो जो भी बना बनाने लगा

मैं इस ख़याल में गुम था कि खो गया हूँ कहीं
कि दस्त-ए-ग़ैब कोई रास्ता बनाने लगा

मुझे लगा कि ये दुनिया नई नहीं बनती
सो एहतिमाम से मिस्रा नया बनाने लगा

हमारा उस का तअ'ल्लुक़ मिसाली होता था
फिर एक फ़ासला इस में जगह बनाने लगा