उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo thakawaT pe mabni nind nahin

जो थकावट पे मब्नी नींद नहीं

جو تھکاوٹ پہ مبنی نیند نہیں

शायर: Ehsanul Haq Mazhar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो थकावट पे मब्नी नींद नहीं
मैं समझता हूँ अच्छी नींद नहीं

आधी बस्ती को जागना होगा
जितनी आँखें हैं उतनी नींद नहीं

मौत से क्यूँ डरा रहे हो मुझे
ये कोई मेरी पहली नींद नहीं

आँखें अच्छी हैं इस सितारे पर
इस सितारे पे अच्छी नींद नहीं

एक दिन उस ने कह दिया मुझ से
मैं तुम्हारी हूँ मेरी नींद नहीं

उस के चेहरे को पढ़ के सोता हूँ
मुझ से अच्छी किसी की नींद नहीं

ख़्वाब कितने ही देखने हैं अभी
और आँखों में रत्ती नींद नहीं