उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo pareshani sar-e-dasht-e-adam hai hum ko

वो परेशानी सर-ए-दश्त-ए-अदम है हम को

وہ پریشانی سر دشت عدم ہے ہم کو

शायर: Ehsanul Haq Mazhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो परेशानी सर-ए-दश्त-ए-अदम है हम को
बाग़-ए-रिज़वान भी मिल जाए तो कम है हम को

अब भी दिल में तिरे होने का गुमाँ बाक़ी है
टूटते बनते इरादों की क़सम है हम को

इस को कहते हैं मियाँ ज़ख़्म का ताज़ा होना
वो किसी और से बिछड़ा है तो ग़म है हम को

तुझ से यूँ माँगते हैं तेरा भरम रह जाए
वर्ना हर चीज़ मोहब्बत में बहम है हम को

तिरे आने पे कोई रद्द-ए-अमल क्या देते
ये ख़ुशी इतनी ज़ियादा है न कम है हम को