उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is liye tez bhagta hun main

इस लिए तेज़ भागता हूँ मैं

اس لئے تیز بھاگتا ہوں میں

शायर: Ehsanul Haq Mazhar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस लिए तेज़ भागता हूँ मैं
अपने पीछे पड़ा हुआ हूँ मैं

घुप अंधेरे में रौशनी की तरह
उस की आँखों से गिर रहा हूँ मैं

मुझ को ग़म तो नहीं जुदाई का
ये मुरव्वत में रो रहा हूँ मैं

याद करना भी उस को छोड़ दिया
आख़िरी चाल चल चुका हूँ मैं

मेरी बातें मज़ाक़ में मत ले
ज़िंदगी तुझ से कुछ बड़ा हूँ मैं

मुझ से वो सुल्ह करने वाला था
और नाराज़ हो गया हूँ मैं

दश्त इस बात पर बहुत ख़ुश है
उस के हिस्से में आ गया हूँ मैं

बातें होने लगी हैं मेरे ख़िलाफ़
या'नी महफ़िल से जा चुका हूँ मैं