उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum samajhte ho zamane ke liye aata tha

तुम समझते हो ज़माने के लिए आता था

تم سمجھتے ہو زمانے کے لئے آتا تھا

शायर: Ehsanul Haq Mazhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम समझते हो ज़माने के लिए आता था
मैं तुम्हें शेर सुनाने के लिए आता था

फिर मुसन्निफ़ ने बिला-वज्ह मुझे मार दिया
मैं कहानी में हँसाने के लिए आता था

रफ़्ता रफ़्ता मुझे मालूम हुआ ध्यान उस का
साँप था और ख़ज़ाने के लिए आता था

मेरे बच्चों को यक़ीं कौन दिलाए कि यहाँ
चाँद झीलों में नहाने के लिए आता था

रूठ जाता था मैं गाँव में भी यूँही 'मज़हर'
पर वहाँ गाँव मनाने के लिए आता था