उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum abas DhunDhte phirte ho kahan rasta tha

तुम अबस ढूँढते फिरते हो कहाँ रस्ता था

تم عبث ڈھونڈھتے پھرتے ہو کہاں رستہ تھا

शायर: Ehsanul Haq Mazhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम अबस ढूँढते फिरते हो कहाँ रस्ता था
हम ने दीवार उठा दी है जहाँ रस्ता था

बस यही सोच के जंगल की तरफ़ आ निकले
साहिब-ए-ख़्वाब बताता है यहाँ रस्ता था

हम ही तक़लीद-परस्तों से अलग थे वर्ना
जिस जगह भीड़ थी लोगों की वहाँ रस्ता था

मैं तिरे शहर-ए-तसव्वुर से अभी लौटा हूँ
पेड़ सरसब्ज़ थे ख़ुशबू थी जवाँ रस्ता था

कर्बला जाते हुए राह से लौट आया हूँ
बुज़दिली देख मिरी नौहा-कुनाँ रस्ता था