उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zara wasl par ho ishaara tumhaara

ज़रा वस्ल पर हो इशारा तुम्हारा

ذرا وصل پر ہو اشارہ تمہارا

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़रा वस्ल पर हो इशारा तुम्हारा
अभी फ़ैसला है हमारा तुम्हारा

बुतो दीन-ओ-दुनिया में काफ़ी है मुझ को
ख़ुदा का भरोसा सहारा तुम्हारा

मोहब्बत के दा'वे मिले ख़ाक में सब
वो कहते हैं क्या है इजारा तुम्हारा

रुकावट न होती तो दिल एक होता
तुम्हारा हमारा हमारा तुम्हारा

निकल कर मिरे घर से ये जान लो तुम
न होगा किसी घर गुज़ारा तुम्हारा

सुना है किसी और को चाहता है
वो दुश्मन हमारा वो प्यारा तुम्हारा

करेंगे सिफ़ारिश हम ऐ 'दाग़' उन से
अगर ज़िक्र आया दोबारा तुम्हारा