उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zara si der charaghon ka dil bahal jae

ज़रा सी देर चराग़ों का दिल बहल जाए

ذرا سی دیر چراغوں کا دل بہل جائے

शायर: Aadarsh Dubey6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़रा सी देर चराग़ों का दिल बहल जाए
ये आफ़्ताब कहीं और जा के जल जाए

ख़ुदा परिंदों के ज़्यादा क़रीब रहता है
अजब नहीं कि शिकारी का तीर जल जाए

मैं रोज़ रोज़ तो चेहरे नहीं बदल सकता
किसी को भेज मिरे आइने बदल जाए

उसे गिरा के ही आगे अगर निकलना है
ख़ुदा करे के मिरा रास्ता बदल जाए

मैं चाहता हूँ तिरे दिल में देर से पहुँचूँ
मैं चाहता हूँ कि पहले मिरी ग़ज़ल जाए

मैं इस लिए भी तिरा ज़िक्र रोज़ करता हूँ
किसी मक़ाम पे शायद ये दिल सँभल जाए