उर्दू शायरी · ग़ज़ल

de do na ek bar mera sath jaan-e-man

दे दो न एक बार मिरा साथ जान-ए-मन

دے دو نہ ایک بار مرا ساتھ جان من

शायर: Aadarsh Dubey6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दे दो न एक बार मिरा साथ जान-ए-मन
आती नहीं है नींद मुझे रात जान-ए-मन

मैं ने तुम्हारी गालियाँ हँस के क़ुबूल की
जाना नहीं था मुझ को हवालात जान-ए-मन

मैं ने भी उन से ज़र न लिया सोच कर यही
लेता नहीं मैं आज भी ख़ैरात जान-ए-मन

मैं ने किया है अपने को ख़ुद एक आइना
लगने लगी है ज़िंदगी सौग़ात जान-ए-मन

रुस्वाइयों के डर से रहा तुम से दूर मैं
समझी नहीं किसी ने मिरी बात जान-ए-मन

'आदर्श' को ये फ़न भी सिखाया है बाप ने
करता नहीं हूँ आज भी मैं घात जान-ए-मन