उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek chehra guman mein rahta hai

एक चेहरा गुमाँ में रहता है

ایک چہرہ گماں میں رہتا ہے

शायर: Aadarsh Dubey5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक चेहरा गुमाँ में रहता है
बादलों के जहाँ में रहता है

हम तो पगडंडियों के राही हैं
और वो कहकशाँ में रहता है

इश्क़ की इक यही ख़राबी है
हर घड़ी इम्तिहाँ में रहता है

सिर्फ़ उस की तलाश है मुझ को
और वो आसमाँ में रहता है

गाँव का हुस्न देखिए साहिब
चाँद कच्चे मकाँ में रहता है