उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil hai alag mizaj ke do bhaiyon ka ghar

दिल है अलग मिज़ाज के दो भाइयों का घर

دل ہے الگ مزاج کے دو بھائیوں کا گھر

शायर: Aadarsh Dubey4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल है अलग मिज़ाज के दो भाइयों का घर
लगता है सिर्फ़ मुझ को ये तन्हाइयों का घर

बेटी गई है घर से लगा हम को बस यही
जैसे चला गया कोई अमराइयों का घर

दूरी बना ली उन से यही सोचने के बाद
घर उन का था मिरे लिए रुस्वाइयों का घर

जब से मिली है उन से नज़र रेस्तौरान में
दिल लग रहा है प्यार की शहनाइयों का घर