उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zamin pe chand utarta dikhai deta hai

ज़मीं पे चाँद उतरता दिखाई देता है

زمیں پہ چاند اترتا دکھائی دیتا ہے

शायर: Yash Trivedi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़मीं पे चाँद उतरता दिखाई देता है
मुझे ये ख़्वाब हमेशा दिखाई देता है

मैं जिस के हिज्र में सिगरेट जलाए बैठा हूँ
धुएँ में उस का ही चेहरा दिखाई देता है

जो तुम ने आज ये बिंदी लगाई है इस का
मक़ाम चाँद से ऊँचा दिखाई देता है

पहन ले जो भी पहनने को दिल करे तेरा
तू हर लिबास में अच्छा दिखाई देता है

तू थक गई है तो कंधे पे मेरे सर रख ले
सफ़र ये 'इश्क़ का लम्बा दिखाई देता है

मैं 'यश' के बारे में इतना बताए देता हूँ
ये वैसा है नहीं जैसा दिखाई देता है