उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karna hai jo aapi kar

करना है जो आपी कर

کرنا ہے جو آپی کر

शायर: Zafar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

करना है जो आपी कर
बा'द में आपा-धापी कर

क़ाबिल-ए-दीद तो है लेकिन
छाती कुछ तो ढाँपी कर

दिल को नेकी भी सिखला
पहले इस को पापी कर

ये रौशन चेहरे भी चूम
ख़ाली धूप न तापी कर

मज़े से पूरी रात गुज़ार
दिन में मुट्ठी चापी कर

चूमा कर मू-ए-ज़ह्हाफ़
ख़ाली नाफ़ न नापी कर