उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zabt kahta hai dil-e-zar sanbhal jaega

ज़ब्त कहता है दिल-ए-ज़ार सँभल जाएगा

ضبط کہتا ہے دل زار سنبھل جائے گا

शायर: Jaleel Qidwai7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ब्त कहता है दिल-ए-ज़ार सँभल जाएगा
शौक़ कहता है अभी तन से निकल जाएगा

कल की शब कट गई जिस तरह से ऐ दर्द-ए-फ़िराक़
आज का दिन भी उसी तरह से टल जाएगा

तुम जो बिगड़े हो तो बिगड़ा है मुक़द्दर अपना
तुम जो संभलो तो मुक़द्दर भी सँभल जाएगा

बद-गुमानी जो उन्हें मुझ से है गर दूर हुई
एक काँटा सा मिरे दिल से निकल जाएगा

तपिश-ए-इश्क़ सलामत है तो इक दिन ऐ दोस्त
दिल तिरा मोम की मानिंद पिघल जाएगा

उस को बख़्शेगा मिरा इश्क़ हयात-ए-जावेद
कौन कहता है तिरा हुस्न ये ढल जाएगा

दर्द-ए-उल्फ़त कहीं मिटता है मिटाए से 'जलील'
आज पहलू से गया और न कल जाएगा