उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bichhaD kar mujhse koi ja raha hai

बिछड़ कर मुझ से कोई जा रहा है

بچھڑ کر مجھ سے کوئی جا رہا ہے

शायर: Jaleel Qidwai6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिछड़ कर मुझ से कोई जा रहा है
कलेजा मुँह को जैसे आ रहा है

लबों पर है तबस्सुम वक़्त-ए-रुख़्सत
मगर दिल है कि उमड़ा आ रहा है

वो आँचल सब्र के दामन के मानिंद
मिरे हाथों से छूटा जा रहा है

ख़फ़ा थे ही जुदा भी हो रहे हैं
फ़लक ये क्या क़यामत ढा रहा है

जुदा यूँ हो रहे हैं मुझ से जैसे
मुक़द्दर मेरा बिगड़ा जा रहा है

'जलील' अब इस से बढ़ कर दाद क्या हो
ग़ज़ल तेरी कोई ख़ुद गा रहा है