उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj yun nala-e-gham ishq ne aaghaz kiya

आज यूँ नाला-ए-ग़म 'इश्क़ ने आग़ाज़ किया

آج یوں نالۂ غم عشق نے آغاز کیا

शायर: Jaleel Qidwai10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज यूँ नाला-ए-ग़म 'इश्क़ ने आग़ाज़ किया
हुस्न को भी हमा-तन गोश-बर-आवाज़ किया

तू ने ये तुर्फ़ा सितम ऐ निगह-ए-नाज़ किया
दिल में इक सोज़ था पहले उसे अब साज़ किया

दिल ने आग़ाज़ जो इक नग़्मा-ए-बे-साज़ किया
साज़-ए-नैरंगी-ए-फ़ितरत को हम-आवाज़ किया

ख़ाना-ए-दिल में वो आए तो ये ए'जाज़ किया
जिस्म-ए-बे-रूह को सरमस्त-ओ-सर-अफ़राज़ किया

तू ने ये काम 'अजब ऐ निगह-ए-नाज़ किया
ताइर-ए-होश को आमादा-ए-पर्वाज़ किया

है वही मेरे लिए हासिल-ए-यक-'उम्र-ए-वफ़ा
तुम ने जो जुर्म-ए-मोहब्बत नज़र-अंदाज़ किया

दिल ने उस नीम-निगाही का इशारा पा कर
रूह को ग़र्क़-ए-निगाह-ए-ग़लत-अंदाज़ किया

दस्त-ए-क़ुदरत ने वही अपनी निकाली मिक़राज़
गुलशन-ए-दहर में जिस गुल ने ज़रा नाज़ किया

मैं वो बुलबुल हूँ कि जब मैं ने क़फ़स को छोड़ा
रुख़ फिर उस सम्त न मैं ने दम-ए-परवाज़ किया

काम दुश्वार था उस शोख़ की उल्फ़त का 'जलील'
तू ने इस को मगर ऐ ‘आशिक़-ए-जाँ-बाज़ किया