उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaban se dil ka fasana ada kiya na gaya

ज़बाँ से दिल का फ़साना अदा किया न गया

زباں سے دل کا فسانہ ادا کیا نہ گیا

शायर: Ijtiba Rizvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़बाँ से दिल का फ़साना अदा किया न गया
ये तर्जुमाँ तो बनी थी मगर बना न गया

हम उन के वा'दा-ए-फ़र्दा को ले के बैठे हैं
कि जिन से आज का वा'दा वफ़ा किया न गया

अमानतन मिरे सीने में वो फ़साना है
जो दिल की आँख से देखा गया सुना न गया

दम-ए-अख़ीर वो देने लगे हयात-ए-दिगर
फिर एक 'उम्र का एहसान था लिया न गया

क़ुसूर-वार हैं दोनों निगाह हो कि ज़बाँ
कि जो कहा गया ऐ दोस्त वो कहा न गया