उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab haalat-e-dil na puchh kya hai

अब हालत-ए-दिल न पूछ क्या है

اب حالت دل نہ پوچھ کیا ہے

शायर: Ijtiba Rizvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब हालत-ए-दिल न पूछ क्या है
शो'ला था भड़क के बुझ गया है

इंसान को दिल मिला मगर क्या
अंधे के हाथ में दिया है

तासीर ने ये कहा है हम से
नाला नग़्मे की इंतिहा है

तेरी दुनिया को हम सँवारें
ये एक अजीब माजरा है

जो दूर से आ रही है 'रिज़वी'
पहचानी हुई सी ये सदा है