उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur phir kaun si ab hogi mulaqat ki raat

और फिर कौन सी अब होगी मुलाक़ात की रात

اور پھر کون سی اب ہوگی ملاقات کی رات

शायर: Ijtiba Rizvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और फिर कौन सी अब होगी मुलाक़ात की रात
भीगी भीगी ये गुनहगार सी बरसात की रात

घूमते कटता है कूचे में तिरे दिन का दिन
बैठे कट जाती है चौखट पे तिरी रात की रात

यूँ हैं बरहम तिरी घनघोर घटा सी ज़ुल्फ़ें
जैसी बिखरी हुई बिफरी हुई ज़ुल्मात की रात

ऐसी आबाद तिरी बज़्म है ऐ जान-ए-नशात
जैसी काबा की सहर जैसी ख़राबात की रात