उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaban ke sath jo badle wo dastan hun main

ज़बाँ के साथ जो बदले वो दास्ताँ हूँ मैं

زباں کے ساتھ جو بدلے وہ داستاں ہوں میں

शायर: Nabil Syed4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़बाँ के साथ जो बदले वो दास्ताँ हूँ मैं
फ़साना और हक़ीक़त के दरमियाँ हूँ मैं

चराग़ अब भी हूँ लेकिन बुझा हुआ कब से
मैं रौशनी था कभी अब तो बस धुआँ हूँ मैं

ख़याल हो के भी था रू-ब-रू कभी तेरे
अगरचे सामने हूँ आज पर निहाँ हूँ मैं

उखड़ गया है ज़मीं से जो वो शजर है तू
जो झुक गया है ज़मीं पर वो आसमाँ हूँ मैं