उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar se tere akele bhale ja rahe hain hum

घर से तिरे अकेले भले जा रहे हैं हम

گھر سے ترے اکیلے بھلے جا رہے ہیں ہم

शायर: Nabil Syed4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर से तिरे अकेले भले जा रहे हैं हम
कुछ दूर साथ चल कि चले जा रहे हैं हम

ख़ुद की बनेंगे वज्ह-ए-तबाही हम एक दिन
इक हादिसा हैं बस-कि टले जा रहे हैं हम

मद्धम हुई है कैसे अचानक ये रौशनी
ये दिन ढला है या कि ढले जा रहे हैं हम

बाहर की आग हम को मयस्सर न हो सकी
अन्दर सुलग सुलग के जले जा रहे हैं हम