उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko kuchh kaam kyon nahin milta

हम को कुछ काम क्यों नहीं मिलता

ہم کو کچھ کام کیوں نہیں ملتا

शायर: Nabil Syed4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को कुछ काम क्यों नहीं मिलता
दर्द का दाम क्यों नहीं मिलता

मैं कि आग़ाज़ हो के बैठा हूँ
मुझ को अंजाम क्यों नहीं मिलता

लोग कहते हैं ज़िंदा लाश हूँ मैं
फिर भी आराम क्यों नहीं मिलता

कुछ तो गहराई नाप ले साक़ी
ज़ख़्म-भर जाम क्यों नहीं मिलता