उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas itni hi hai tamanna ki ek bar mile

बस इतनी ही है तमन्ना कि एक बार मिले

بس اتنی ہی ہے تمنا کہ ایک بار ملے

शायर: Nabil Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस इतनी ही है तमन्ना कि एक बार मिले
बहार का रहे मौसम हमें बहार मिले

सुनाएँ कैसे कहानी किसी को हम अपनी
जब उस में अपना ही किरदार तार-तार मिले

जो ज़ख़्म दिल पे थे वो वक़्त भी न भर पाया
जो ग़म-गुसार मिले वो भी दिल-फ़िगार मिले

तिरी वफ़ा के यक़ीं में बिना सिपर आए
जफ़ा के तीर सभी दिल के आर-पार मिले

कोई भी नुक़्स नहीं था हमारी आँखों में
हमारे 'अक्स को आईने अश्क-बार मिले