उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaya hua tamam hunar nind aa gai

ज़ाया हुआ तमाम हुनर नींद आ गई

ضائع ہوا تمام ہنر نیند آ گئی

शायर: Balmohan panday6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ाया हुआ तमाम हुनर नींद आ गई
शब को सजा रहा था मगर नींद आ गई

मैं चाहता तो ये हूँ कहानी तवील हो
फिर ये भी सोचता हूँ अगर नींद आ गई

करवट बदल ली दोनों ने इक ख़ामुशी के बाद
मैं रो पड़ा और उस को उधर नींद आ गई

दफ़्तर में तय किया था कि तारे गिनेंगे आज
लेकिन हमें पहुँचते ही घर नींद आ गई

कुछ दोस्तों ने आने से इंकार कर दिया
कुछ दोस्तों को बीच सफ़र नींद आ गई

इक रात उम्र भर की थकन का सबब ऐ दोस्त
हम सोच ही रहे थे मगर नींद आ गई