उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaghaz se anjam-e-safar dekh raha hun

आग़ाज़ से अंजाम-ए-सफ़र देख रहा हूँ

آغاز سے انجام سفر دیکھ رہا ہوں

शायर: Balmohan panday6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आग़ाज़ से अंजाम-ए-सफ़र देख रहा हूँ
देखा नहीं जाता है मगर देख रहा हूँ

तैराक लगातार यहाँ डूब रहे हैं
चुप-चाप मैं दरिया का हुनर देख रहा हूँ

इस ख़्वाब की ता'बीर कोई मुझ को बता दे
मंज़िल से भी आगे का सफ़र देख रहा हूँ

उस शख़्स के होंटों पे मिरा ज़िक्र बहुत है
मैं अपनी दुआओं का असर देख रहा हूँ

जो तुझ को बहुत दूर कभी ले गई मुझ से
मैं कब से वही राहगुज़र देख रहा हूँ

इक उम्र से क़ाएम है ये रातों की हुकूमत
इक उम्र से मैं ख़्वाब-ए-सहर देख रहा हूँ