उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nikal paun main kaise is asar se

निकल पाऊँ मैं कैसे इस असर से

نکل پاؤں میں کیسے اس اثر سے

शायर: Balmohan panday5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निकल पाऊँ मैं कैसे इस असर से
महकते फूल झड़ते हैं नज़र से

मोहब्बत के सफ़र के बाद ख़ल्वत
सफ़र आसान है पिछले सफ़र से

गए थे उन से तर्क-ए-इश्क़ करने
नज़र हट ही न पाई इस नज़र से

दुपट्टे से वो मुँह ढाँके हुए हैं
मोहब्बत हो गई पीले कलर से

ख़ुद अपने दिल से डर लगने लगा है
कोई आवाज़ आती है इधर से