उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aish mazi ke gina haal ka tana de de

ऐश माज़ी के गिना हाल का ता'ना दे दे

عیش ماضی کے گنا حال کا طعنہ دے دے

शायर: Balmohan panday5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐश माज़ी के गिना हाल का ता'ना दे दे
घर पलटने के लिए कोई बहाना दे दे

मैं ने इस शहर को इक शख़्स का हमनाम किया
चाहे अब जो भी इसे नाम ज़माना दे दे

संग-ज़ादों को भी ता'मीर में शामिल कर लो
इस से पहले कि कोई आइना-ख़ाना दे दे

उस का रूमाल भी मजबूरी था हमदर्दी नहीं
उस को ये डर था कोई और न शाना दे दे

दिल के उजड़े हुए जंगल को पड़ा रहने दो
ऐन मुमकिन है परिंदों को ठिकाना दे दे