उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zawiya honTon ka wo dilkash banata kis tarah

ज़ाविया होंटों का वो दिलकश बनाता किस तरह

زاویہ ہونٹوں کا وہ دل کش بناتا کس طرح

शायर: Qais Rampuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ाविया होंटों का वो दिलकश बनाता किस तरह
रूह ज़ख़्मीदा बहुत थी मुस्कुराता किस तरह

उँगलियाँ भी क़ुव्वत-ए-बीनाई रखती हैं बहुत
मैं किसी के जिस्म को ये सच बताता किस तरह

कल मिरे बच्चे भी आ सकते हैं ख़ुशबू के लिए
शहर-ए-गुल में ज़हर के काँटे बिछाता किस तरह

फ़न की दौलत बढ़ गई तो दिल के टुकड़े हो गए
मैं समुंदर बन गया तो घर बचाता किस तरह

मैं हूँ इक पत्थर मगर दस्त-ए-हुनर में रह गया
शीश-महलों की है क़िस्मत क्या बताता किस तरह