उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHuda tha muntazir ek aadmi ka

ख़ुदा था मुंतज़िर इक आदमी का

خدا تھا منتظر اک آدمی کا

शायर: Qais Rampuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुदा था मुंतज़िर इक आदमी का
ये क़िस्सा है किसी रौशन सदी का

मिले जलता हुआ घर जब किसी का
तो लिखना मर्सिया तुम रौशनी का

जो मुमकिन हो तो ज़िंदा रखना रिश्ता
अना का और नेज़े की अनी का

कहीं ख़ुशबू नफ़स की उड़ न जाए
लिफ़ाफ़ा बंद रखना ज़िंदगी का

शरीफ़-ए-शहर समझेगा भी कैसे
मज़ा हम जैसों की आवारगी का