उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo chand log mere sher sun ke jate hain

जो चंद लोग मिरे शे'र सुन के जाते हैं

جو چند لوگ مرے شعر سن کے جاتے ہیں

शायर: Qais Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो चंद लोग मिरे शे'र सुन के जाते हैं
तिलिस्म-ए-होश-रुबा पढ़ने बैठ जाते हैं

मसर्रतों को समझने की कैसी रुत आई
सगान-ए-शहर भी अब क़हक़हे लगाते हैं

लिबास माँग के पहना है कुछ रफ़ीक़ों ने
और उस पे लुत्फ़ मुझे आइना दिखाते हैं

वही बताएँगे तन्हा शबों की मे'राजें
जो अपनी ज़ात के मदफ़न में डूब जाते हैं

हर एक लम्हा कसी जा रही हैं ज़ंजीरें
'अजब ग़ुलाम हैं हम फिर भी मुस्कुराते हैं

न-जाने कौन मुझे याद कर के रोया 'क़ैस'
हवा के दोष पे अश्कों के जाम आते हैं