उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh is tarah teri tafsir kar rahe hain hum

कुछ इस तरह तिरी तफ़्सीर कर रहे हैं हम

کچھ اس طرح تری تفسیر کر رہے ہیں ہم

शायर: Qais Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ इस तरह तिरी तफ़्सीर कर रहे हैं हम
छलकते जाम को तस्वीर कर रहे हैं हम

हमारे बच्चों के सर माँगती हैं बुनियादें
ये कैसे शहर की ता'मीर कर रहे हैं हम

वो दूर राह में इंसाँ न जल रहा हो कोई
जिसे चराग़ से ता'बीर कर रहे हैं हम

तुम अपने ज़ख़्मों का कोई हिसाब मत रखना
बयाज़-ए-क़ल्ब पे तहरीर कर रहे हैं हम

तिरी ख़िरद को किसी दिन जकड़ के रख देंगे
अभी जुनून को ज़ंजीर कर रहे हैं हम

है कैसा कर्ब कि अपनी ही सरज़मीन पे 'क़ैस'
दिफ़ा'-ए-सुन्न-ए-शब्बीर कर रहे हैं हम