उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun tasawwur mein khile gul hain teri baat ke baad

यूँ तसव्वुर में खिले गुल हैं तेरी बात के बाद

یوں تصور میں کھلے گل ہیں تیری بات کے بعد

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तसव्वुर में खिले गुल हैं तेरी बात के बाद
जैसे गुलशन में निखर जाए फ़ज़ा रात के बाद

बे-क़रारी न गई और न मिटी दिल की ख़लिश
न मुलाक़ात से पहले न मुलाक़ात के बाद

ग़म-ए-दुनिया भी नहीं ख़्वाहिश-ए-उक़्बा भी नहीं
क्या रहा दिल में मिरे इश्क़ के जज़्बात के बाद

शाम रंगीं हैं सहर में है न वो कैफ़-ओ-सुरूर
तेरी सोहबत में वो गुज़रे हुए लम्हात के बाद

रह-रव-ए-शौक़ ही क्या जो सर-ए-मंज़िल न लुटा
बाज़ी-ए-इश्क़ में आता है मज़ा मात के बाद

रू-ब-रू तेरे कोई बात बनाए न बने
किस तरह बात बने मेरी तिरी बात के बाद

मय में मस्ती है न मय-ख़ारों में वो जोश-ओ-ख़रोश
मय-कदा सूना हुआ रिंद-ए-ख़राबात के बाद

बादा-ए-हुस्न से सरशार रहे रोज़ 'हबीब'
कैफ़ हर कैफ़ है हर रात में हर रात के बाद