उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aa gae wo mere KHayalon mein

आ गए वो मिरे ख़यालों में

آ گئے وہ مرے خیالوں میں

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आ गए वो मिरे ख़यालों में
घंटियाँ बज उठीं शिवालों में

रात को चीर कर किरन उभरी
रात घुल मिल गई उजालों में

निगह-ए-शोख़ तेरी क्या उट्ठी
बिजली कौंधी कमल के तालों में

एक लम्हा ख़ुशी का क्या कम है
ज़िंदगी कब है माह सालों में

देख कर पल में फूल गिरता हुआ
झुरझुरी सी है हुस्न वालों में

हासिल-ए-ज़ीस्त है वही लम्हें
जो कि गुज़रे तिरे ख़यालों में

जब किया ज़िक्र बे-मिसालों का
ज़िंदगी बस गई मिसालों में