उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj tabir KHwabon ki hum pa gae

आज ता'बीर ख़्वाबों की हम पा गए

آج تعبیر خوابوں کی ہم پا گئے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज ता'बीर ख़्वाबों की हम पा गए
लो जिन्हें चाहते थे वो ख़ुद आ गए

जब इशारा नज़र का तिरी पा गए
बे-मुहाबा ज़माने से टकरा गए

किस ख़ुशी से उठाया है हर एक ग़म
दोस्त जब से तिरी हम रज़ा पा गए

अब तो जल्वे ही जल्वे निगाहों में हैं
तुम तसव्वुर की दुनिया पे यूँ छा गए

ख़ुद ज़माना भी अब मेहरबाँ हो गया
हम ग़म-ए-दोस्त जब से तुझे पा गए

आ रहा था जफ़ाओं में मुझ को मज़ा
जाने क्या सोच कर अब वो बाज़ आ गए

फूल मुरझा गए और गिरे शाख़ से
एक पल की हँसी की सज़ा पा गए

क्यों फ़रेब-ए-वफ़ा भी न रहने दिया
ये सहारा भी जीने का तुम ढा गए

ए'तिबार उन के वा'दों का कब था हमें
हम ख़ुशी से ये धोके मगर खा गए

वो जो खेला किए मेरे दिल का शिकार
आज वो अपने ही दाम में आ गए

दिल की बर्बादियों का गिला जिन से था
आज फिर उन की बातों में हम आ गए

एक 'हबीब' उस से पहले थे हम अजनबी
दर्द दे कर मुझे आप अपना गए