उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj un ka mizaj barham hai

आज उन का मिज़ाज बरहम है

آج ان کا مزاج برہم ہے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज उन का मिज़ाज बरहम है
या मुक़द्दर में एक नया ख़म है

चलते चलते मैं थक गया लेकिन
रात बाक़ी है रौशनी कम है

कोई तन्हाई सी है तन्हाई
चार-सू एक हू का आलम है

साक़ी चुप-चाप मै-कदा सूना
साज़ की लय भी आज मद्धम है

दाग़ दिल के दिखाऊँ मैं किस को
अपना अपना हर एक का ग़म है

दिल के आईने में जहाँ देखा
गोया दिल एक साग़र-ए-जम है

चोली दामन का साथ है उन का
ज़िंदगी है जहाँ वहाँ ग़म है

आशियाने का अब ख़ुदा-हाफ़िज़
बाग़बाँ का मिज़ाज बरहम है

कौन ख़ुश-बख़्त आज याद आया
आँख क्यों ये तुम्हारी पुर-नम है

आते होंगे 'हबीब' वो शायद
दर्द पहले से आज कुछ कम है