उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abhi husn KHud se hai be-KHabar abhi ishq bhi hai nihan nihan

अभी हुस्न ख़ुद से है बे-ख़बर अभी इश्क़ भी है निहाँ निहाँ

ابھی حسن خود سے ہے بے خبر ابھی عشق بھی ہے نہاں نہاں

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अभी हुस्न ख़ुद से है बे-ख़बर अभी इश्क़ भी है निहाँ निहाँ
न हैं क़िस्से राज़-ओ-नियाज़ के न फ़साने दिल के ज़बाँ ज़बाँ

कभी भूल सकता हूँ हम-नशीं वो निगाह-ए-उल्फ़त-ए-अव्वलीं
वो समाँ था कितना हसीं हसीं थी वो शब भी कितनी जवाँ जवाँ

तिरे इश्क़ ने मुझे कर दिया ग़म-ए-दो-जहाँ से ही बे-नियाज़
कि में ख़ार-ज़ार-ए-हयात से भी गुज़र रहा हूँ रवाँ रवाँ

मिरे दिल का हाल जो हो सो हो तिरे लब का ग़ुंचा खिला रहे
रहे गिरती नज़रों की बिजलियाँ मिरा चाहे काँपे रूवाँ रूवाँ

कभी जंगलों में भटक गए कभी सैर की है चमन चमन
तिरी याद दर्द कसक मगर रही साथ साथ यहाँ वहाँ

न हरम में तेरा निशाँ मिला न सनम-कदे में कोई पता
कि न जाने तेरी तलाश में मैं फिरा भटकता कहाँ कहाँ

तिरे हुस्न-ए-सब्र-गुदाज़ की नहीं ताब इस दिल-ए-ज़ार को
मिरा बह गया वो ग़ुरूर-ए-इश्क़ मैं रहा हूँ कितना कशाँ कशाँ

ये तिरी ने बदल दिए मिरे रास्ते मिरी मंज़िलें
ये जहाँ जहाँ मुझे ले चली मैं चला 'हबीब' वहाँ वहाँ